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भाग 4: दैनिक जीवन में पीएच का महत्व और आत्मरक्षा – UP Board Class 10 Science

विज्ञान की इस कक्षा में आप सभी का स्वागत है। आज हम एक बहुत ही व्यावहारिक विषय पर बात करने वाले हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे शरीर के अंदर का वातावरण किस पीएच पर काम करता है? या फिर मधुमक्खी के काटने पर हम बेकिंग सोडा क्यों लगाते हैं? प्रकृति ने हमें बहुत से ऐसे संकेत दिए हैं, जिन्हें समझकर हम अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान निकाल सकते हैं।

आज हम जानेंगे कि कैसे पीएच का संतुलन न केवल पौधों और पशुओं के लिए, बल्कि हमारे पेट, हमारे दाँतों और आत्मरक्षा के लिए भी कितना महत्वपूर्ण है।

जीवित प्राणियों में पीएच का संतुलन

हमारा शरीर बहुत ही नाजुक है। यह 7.0 से 7.8 पीएच के बीच ही सबसे अच्छे तरीके से काम करता है। जीवित प्राणी केवल इसी संकीर्ण पीएच परास में जीवित रह सकते हैं।

अम्लीय वर्षा: जब हवा में प्रदूषण के कारण वर्षा के जल का पीएच मान 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं। यह जल जब नदियों में बहकर जाता है, तो वह नदी के पानी के पीएच को इतना कम कर देता है कि वहां रहने वाली मछलियों और अन्य जलीय जीवों का जीवित रहना कठिन हो जाता है।

पाचन तंत्र में पीएच का खेल

क्या आपको कभी एसिडिटी हुई है? हमारा उदर (पेट) भोजन को पचाने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पैदा करता है। यह उदर को नुकसान पहुँचाए बिना भोजन को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब हम बहुत ज्यादा या चटपटा खाना खा लेते हैं, तो उदर जरूरत से ज्यादा अम्ल बनाने लगता है। इससे पेट में दर्द और जलन होती है।

इस जलन से राहत पाने के लिए हम ‘ऐन्टैसिड’ (Antacid) लेते हैं, जैसे कि मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैगनीशिया)। यह एक दुर्बल क्षारक है, जो पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन (Neutralize) कर देता है और हमें तुरंत राहत मिलती है।

दांतों का क्षय और पीएच

क्या आप जानते हैं कि हमारे मुँह के पीएच का मान अगर 5.5 से कम हो जाए, तो दाँत झड़ने लगते हैं? हमारे दाँतों का इनैमल (सबसे बाहरी हिस्सा) कैल्सियम फॉस्फेट से बना होता है, जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। जब हम खाना खाते हैं, तो मुँह में बचे शर्करा और खाद्य कणों को बैक्टीरिया छोटे-छोटे अम्ल में बदल देते हैं। यही अम्ल हमारे दाँतों को गलाने लगते हैं। इसीलिए खाना खाने के बाद क्षारकीय दंत-मंजन से मुँह साफ करना जरूरी होता है, ताकि अम्ल का असर खत्म हो सके।

मधुमक्खी और पौधों की आत्मरक्षा

प्रकृति में हर जीव के पास अपनी रक्षा का तरीका है। अगर आपको कभी मधुमक्खी ने काटा है, तो आपने उस भयंकर जलन को महसूस किया होगा। मधुमक्खी का डंक एक खास अम्ल छोड़ता है। अगर आप डंक वाले स्थान पर बेकिंग सोडा जैसा कोई दुर्बल क्षारक लगाएंगे, तो आपको तुरंत आराम मिलेगा।

ठीक इसी तरह, ‘नेटल’ (Nettle) नाम का एक पौधा होता है, जिसके पत्तों में डंक जैसे बाल होते हैं। अगर गलती से कोई उन्हें छू ले, तो वह मेथैनॉइक अम्ल छोड़ते हैं जिससे बहुत तेज दर्द होता है। इसके इलाज के लिए प्रकृति ने उसी के पास ‘डॉक’ नाम का पौधा उगाया है, जिसकी पत्तियां रगड़ने पर दर्द ठीक हो जाता है।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, बोर्ड परीक्षा में पौधों और जानवरों द्वारा छोड़े गए अम्लों के नाम अक्सर पूछे जाते हैं। मधुमक्खी के डंक में मौजूद अम्ल और नेटल के पौधों में मौजूद अम्ल को ‘मेथैनॉइक अम्ल’ (Methanoic acid) कहा जाता है। इसे याद रखिएगा!

अब खेलें: पीएच का महत्व क्विज़

यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के पीएच आधारित इस मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी की जाँच करें!

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