भाग 1: धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणधर्म – UP Board Class 10 Science

जरा कल्पना कीजिए कि एक सुबह आप सोकर उठें और दुनिया की सारी धातुएँ गायब हो जाएँ। क्या होगा? न तो खाना पकाने के लिए बर्तन बचेंगे, न स्कूल जाने के लिए साइकिल या बस, और न ही आपके हाथ में मोबाइल फोन होगा! हमारा पूरा आधुनिक जीवन धातुओं और अधातुओं की नींव पर टिका हुआ है।

लेकिन हम कैसे तय करते हैं कि कोई चीज धातु है या अधातु? क्या यह सिर्फ देखने भर से पता चल जाता है? आज के इस पहले भाग में हम धातुओं और अधातुओं के ‘भौतिक गुणधर्मों’ (Physical Properties) यानी उनकी बनावट, ताकत और बाहरी स्वभाव को बहुत ही गहराई से समझेंगे।

धातुओं के अनोखे भौतिक गुणधर्म

विज्ञान की प्रयोगशाला में आयरन (लोहा), कॉपर (तांबा), एल्युमिनियम और मैग्नीशियम जैसी धातुओं को देखकर हम उनके कई विशेष गुणों का पता लगा सकते हैं। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं:

1. धात्विक चमक और कठोरता

अपने शुद्ध रूप में धातुओं की सतह बहुत चमकदार होती है। इसे धात्विक चमक कहते हैं। इसी चमक के कारण सोने और चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है। इसके अलावा, धातुएँ सामान्यतः बहुत कठोर होती हैं। अगर आप लोहे या तांबे को चाकू से काटने की कोशिश करेंगे, तो आप सफल नहीं होंगे। (हालाँकि इसके कुछ अपवाद भी हैं, जिनके बारे में हम आगे पढ़ेंगे)।

2. आघातवर्ध्यता और तन्यता की शक्ति

क्या आपने कभी सोचा है कि लोहे का एक मोटा टुकड़ा पतली चादर या बक्से में कैसे बदल जाता है? धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतली चादर बनाने की इस जादुई क्षमता को आघातवर्ध्यता कहते हैं। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।

इसी तरह, धातुओं को खींचकर उनके बहुत पतले तार भी बनाए जा सकते हैं, जिसे तन्यता कहा जाता है। आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि केवल 1 ग्राम सोने को खींचकर 2 किलोमीटर लंबा तार बनाया जा सकता है!

3. ऊष्मा और विद्युत की सुचालकता

हमारे घरों में खाना पकाने के बर्तन एल्युमिनियम या तांबे के ही क्यों होते हैं? क्योंकि धातुएँ ऊष्मा (गर्मी) की बहुत अच्छी सुचालक होती हैं। इनका गलनांक (पिघलने का तापमान) बहुत अधिक होता है। सिल्वर (चाँदी) और कॉपर ऊष्मा के सबसे बेहतरीन चालक हैं। इसके अलावा, धातुएँ विद्युत (बिजली) की भी सुचालक होती हैं, इसीलिए बिजली के तार तांबे से बनाए जाते हैं।

4. ध्वानिक गुण

जब कोई धातु किसी कठोर सतह से टकराती है, तो एक विशेष प्रकार की गूंजती हुई आवाज पैदा होती है। धातुओं के इसी गुण को ध्वानिक (सोनोरस) कहते हैं। यही कारण है कि हमारे स्कूलों की घंटी और मंदिरों के घंटे धातुओं के बनाए जाते हैं।

अधातुओं की विशेषताएँ: धातुओं से बिल्कुल अलग

कार्बन, सल्फर, आयोडीन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन आदि अधातुओं के उदाहरण हैं। अधातुओं के गुण धातुओं के बिल्कुल विपरीत होते हैं:

  • ये आघातवर्ध्य या तन्य नहीं होती हैं। (कोयले को पीटने पर वह चादर नहीं बनता, बल्कि टूटकर बिखर जाता है)।
  • ये ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं।
  • ब्रोमीन एक ऐसी अधातु है जो कमरे के तापमान पर तरल (द्रव) अवस्था में पाई जाती है, बाकी सभी अधातुएँ ठोस या गैस होती हैं।

विज्ञान के कुछ रोचक अपवाद

रसायन विज्ञान में हमेशा कुछ न कुछ ऐसा होता है जो सामान्य नियमों को तोड़ देता है। इन्हें हम अपवाद कहते हैं:

  • पारा (मर्करी): सभी धातुएँ ठोस होती हैं, लेकिन ‘पारा’ अकेली ऐसी धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव (तरल) अवस्था में रहती है।
  • गैलियम और सीज़ियम: धातुओं का गलनांक बहुत ज्यादा होता है, लेकिन इन दोनों धातुओं को अगर आप अपनी हथेली पर रखेंगे, तो ये शरीर की गर्मी से ही पिघलने लगेंगी।
  • आयोडीन: अधातुएँ चमकदार नहीं होतीं, लेकिन आयोडीन एक ऐसी अधातु है जो बहुत चमकीली होती है।
  • कार्बन के रूप (अपररूप): कार्बन एक अधातु है। इसका एक रूप ‘हीरा’ दुनिया का सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। वहीं इसका दूसरा रूप ‘ग्रेफ़ाइट’ (पेंसिल की नोक) विद्युत का बहुत अच्छा सुचालक है।
  • मुलायम धातुएँ: लिथियम, सोडियम और पोटैशियम ऐसी धातुएँ हैं जो इतनी मुलायम होती हैं कि आप इन्हें पनीर की तरह चाकू से आसानी से काट सकते हैं!

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