भाग 3: सक्रियता श्रेणी और धातुओं की विस्थापन अभिक्रियाएँ – UP Board Class 10 Science

विज्ञान की इस रोमांचक कक्षा में आपका स्वागत है। जरा सोचिए, अगर किसी बस में सारी सीटें भरी हों और कोई बहुत ही ताकतवर पहलवान अंदर आ जाए, तो क्या होगा? वह किसी कमजोर व्यक्ति को उठाकर उसकी सीट पर खुद बैठ जाएगा! आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारी रसायन विज्ञान की दुनिया में धातुओं के बीच भी बिल्कुल ऐसी ही ताकत की लड़ाई चलती है।

आज हम जानेंगे कि कैसे एक ताकतवर धातु, किसी कमजोर धातु को उसके ही घर (यौगिक) से धक्के मारकर बाहर निकाल देती है। साथ ही, हम उस ‘रैंकिंग लिस्ट’ के बारे में भी जानेंगे जो यह तय करती है कि कौन सी धातु सबसे बड़ी पहलवान है और कौन सी सबसे कमजोर।

धातुओं की आपसी लड़ाई: विस्थापन अभिक्रिया

जब हम किसी धातु को दूसरी धातु के लवण विलयन (Salt Solution) में डालते हैं, तो उनके बीच ताकत का मुकाबला होता है। विज्ञान के नियम के अनुसार, अधिक अभिक्रियाशील धातु, अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देती है (हटा देती है)। इसी पूरी प्रक्रिया को ‘विस्थापन अभिक्रिया’ कहा जाता है।

लोहे की कील और तांबे का प्रयोग

आइए इसे एक बहुत ही प्रसिद्ध प्रयोग से समझते हैं। यदि आप कॉपर सल्फेट (नीले रंग का घोल) में लोहे की एक साफ कील डाल दें, तो 20 मिनट बाद क्या होगा? चूँकि लोहा (आयरन), तांबे (कॉपर) से ज्यादा ताकतवर (अधिक अभिक्रियाशील) है, इसलिए लोहा तांबे को उसके घोल से बाहर निकाल फेंकेगा और खुद सल्फेट के साथ जुड़ जाएगा।

नतीजा यह होगा कि नीले रंग का घोल हल्के हरे रंग (आयरन सल्फेट) में बदल जाएगा, और लोहे की कील के ऊपर बाहर निकाले गए तांबे की भूरी परत जमा हो जाएगी। लेकिन अगर आप आयरन सल्फेट के घोल में तांबे का तार डालेंगे, तो कोई अभिक्रिया नहीं होगी, क्योंकि तांबा लोहे को नहीं हटा सकता।

सक्रियता श्रेणी: धातुओं की ताकत का पैमाना

अब सवाल यह उठता है कि हमें कैसे पता चलेगा कि कौन सी धातु किससे ज्यादा ताकतवर है? वैज्ञानिकों ने धातुओं को हवा, पानी और अम्लों के साथ उनकी अभिक्रियाओं के आधार पर परखा और उनकी ताकत के हिसाब से एक सूची तैयार की। वह सूची जिसमें धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के अवरोही क्रम (घटते क्रम) में व्यवस्थित किया जाता है, उसे सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) कहते हैं।

श्रेणी का क्रम और उसकी विशेषताएँ

इस श्रेणी में धातुओं को तीन मुख्य हिस्सों में बाँटा गया है:

  • सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ (शीर्ष पर): पोटैशियम (K) और सोडियम (Na) इस लिस्ट में सबसे ऊपर बैठे ‘पहलवान’ हैं। ये इतने ताकतवर हैं कि ठंडे पानी और हवा में भी आग लगा देते हैं।
  • मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (बीच में): जिंक (Zn), आयरन (Fe) और लेड (Pb) बीच के हिस्से में आते हैं। ये न तो बहुत ज्यादा तेज होते हैं और न ही बहुत कमजोर।
  • सबसे कम अभिक्रियाशील धातुएँ (सबसे नीचे): तांबा (Cu), चाँदी (Ag) और सोना (Au) इस सूची में सबसे नीचे आते हैं। ये बहुत ही शांत धातुएँ हैं जो आसानी से किसी से अभिक्रिया नहीं करतीं। इसीलिए सोने और चाँदी के आभूषण कभी काले नहीं पड़ते।
👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, सक्रियता श्रेणी में आप ‘हाइड्रोजन’ को भी देखेंगे। हाइड्रोजन कोई धातु नहीं है, फिर भी इसे लिस्ट में रखा गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि हम इसकी तुलना कर सकें। जो धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर हैं, वे अम्लों में से हाइड्रोजन गैस को बाहर निकाल सकती हैं। जो नीचे हैं (जैसे तांबा, सोना), वे अम्लों में से हाइड्रोजन को नहीं निकाल सकतीं!

अब खेलें: सक्रियता श्रेणी और विस्थापन क्विज़

यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस महत्वपूर्ण विषय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी की जाँच करें!

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