क्या आपने कभी दिल्ली के कुतुब मीनार के पास खड़े ‘लौह स्तंभ’ (Iron Pillar) को देखा है? यह स्तंभ 1600 साल से भी ज्यादा पुराना है और खुले आसमान के नीचे खड़ा है, फिर भी आज तक इसमें जंग नहीं लगा है! यह हमारे प्राचीन भारत के धातु विज्ञान का एक अद्भुत चमत्कार है।
हम जानते हैं कि जब लोहे जैसी धातुएँ हवा और नमी के संपर्क में आती हैं, तो वे जंग खाकर खराब हो जाती हैं। विज्ञान की भाषा में इसे संक्षारण कहते हैं। आज के इस अंतिम भाग में हम यह सीखेंगे कि हम अपनी कीमती धातुओं को जंग से कैसे बचा सकते हैं और कैसे दो धातुओं को मिलाकर एक ‘सुपर-धातु’ (मिश्रातु) बना सकते हैं, जो कभी खराब नहीं होती।
संक्षारण से धातुओं की सुरक्षा (Protection from Corrosion)
संक्षारण के कारण हर साल दुनिया भर में अरबों रुपये का नुकसान होता है। लोहे को जंग से बचाने के लिए हम कुछ बहुत ही सामान्य और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं:
1. पेंट करना और तेल या ग्रीस लगाना
यह सबसे आसान तरीका है। जब हम लोहे के गेट या ग्रिल पर पेंट या ग्रीस लगा देते हैं, तो लोहे और हवा (ऑक्सीजन और नमी) के बीच संपर्क टूट जाता है, जिससे जंग नहीं लगता।
2. यशदलेपन (Galvanization)
यह परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। लोहे और इस्पात (Steel) को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जिंक (जस्ते) की एक पतली परत चढ़ा दी जाती है। इस प्रक्रिया को यशदलेपन कहते हैं। अगर गलती से जिंक की परत खरोंच भी जाए, तब भी अंदर का लोहा जंग से सुरक्षित रहता है।
3. क्रोमियम लेपन और ऐनोडीकरण
साइकिल के हैंडल और कारों के बंपर इतने चमकदार क्यों होते हैं? क्योंकि उन पर क्रोमियम धातु की परत चढ़ाई जाती है, जिस पर जंग नहीं लगता। इसी तरह एल्युमिनियम पर भी ऑक्साइड की मोटी परत (ऐनोडीकरण) बनाकर उसे सुरक्षित किया जाता है।
मिश्रातु या मिश्रधातु: धातुओं का सुपर रूप
धातुओं के गुणों को और भी बेहतर बनाने का सबसे अच्छा तरीका है—मिश्रातु (Alloys) बनाना। दो या दो से अधिक धातुओं (या धातु और अधातु) के समांगी मिश्रण को मिश्रातु कहते हैं।
इसे कैसे बनाते हैं? पहले मूल धातु को पिघलाया जाता है, और फिर उसमें दूसरी धातु या अधातु को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर ठंडा कर लिया जाता है। ऐसा करने से नई धातु की ताकत बढ़ जाती है और उस पर जंग भी नहीं लगता।
कुछ बहुत ही प्रसिद्ध मिश्रातु और उनके उपयोग
- स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel): शुद्ध लोहा बहुत मुलायम होता है। लेकिन जब हम लोहे में थोड़ा सा ‘कार्बन’ (0.05%) मिलाते हैं, तो वह कठोर हो जाता है। अगर हम लोहे में निकेल और क्रोमियम मिला दें, तो हमें ‘स्टेनलेस स्टील’ मिलता है। यह बहुत कठोर होता है और इस पर कभी जंग नहीं लगता। हमारे घरों के बर्तन इसी से बनते हैं।
- पीतल (Brass): यह तांबे (कॉपर) और जस्ते (जिंक) की मिश्रधातु है। इसका उपयोग सजावट के सामान और बर्तन बनाने में होता है।
- कांसा (Bronze): यह तांबे और टिन (Tin) की मिश्रधातु है। कांसा विद्युत का कुचालक होता है और इसका उपयोग मूर्तियां व मेडल (Bronze Medal) बनाने में होता है।
- सोल्डर (Solder): यह सीसा (Lead) और टिन की मिश्रधातु है। इसका गलनांक (पिघलने का बिंदु) बहुत कम होता है। इसलिए इसका उपयोग बिजली के तारों को आपस में वेल्डिंग (जोड़ने) करने के लिए किया जाता है।
- अमलगम (Amalgam): यदि किसी भी मिश्रातु में एक धातु ‘पारा’ (मर्करी) है, तो उस मिश्रातु को अमलगम कहा जाता है।
अब खेलें: संक्षारण और मिश्रातु क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस अध्याय के अंतिम विषय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी को पूरी करें!
Total Slides: 7
Total Questions: 11 | Total Marks: 19
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अध्याय 3 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणधर्म
- भाग 2: धातुओं के रासायनिक गुणधर्म और वायु व जल से अभिक्रिया
- भाग 3: सक्रियता श्रेणी और धातुओं की विस्थापन अभिक्रियाएँ
- भाग 4: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं: आयनिक यौगिक
- भाग 5: धातुओं की प्राप्ति: अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण
- You are Reading Here: संक्षारण से बचाव और मिश्रातु (मिश्रधातु) का निर्माण