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भाग 2: जंतुओं और मनुष्यों में पोषण (मानव पाचन तंत्र) – UP Board Class 10 Science

पिछले भाग में हमने देखा था कि पेड़-पौधे धूप और पानी से अपना भोजन खुद बना लेते हैं। लेकिन हम इंसान और जानवर ऐसा नहीं कर सकते। हमें भूख लगती है और हम बाहर से खाना खाते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आपके द्वारा खाया गया एक रोटी का टुकड़ा या सेब, आपके शरीर को ऊर्जा (ताकत) कैसे देता है?

रोटी या सेब के टुकड़े बहुत बड़े होते हैं, हमारा खून उन्हें सीधे तौर पर नहीं सोख सकता। इसलिए हमारे शरीर में एक पूरी मशीनरी लगी है जो इस बड़े भोजन को पीसकर, गलाकर इतना छोटा कर देती है कि वह आसानी से खून में मिल जाए। इसी मशीनरी को ‘पाचन तंत्र’ कहते हैं। आइए अमीबा से लेकर इंसानों तक, इस भोजन के पचने की कहानी को गहराई से समझते हैं।

अमीबा में पोषण: एक अनोखा तरीका

अमीबा एक बहुत ही सूक्ष्म (एककोशिकीय) जीव है, जो तालाबों में पाया जाता है। इसका कोई मुँह नहीं होता! जब अमीबा को कोई भोजन दिखता है, तो वह अपने शरीर के आकार को बदलकर उंगली जैसी आकृतियाँ निकालता है, जिन्हें कूटपाद (Pseudopodia) कहते हैं। इन कूटपादों से वह भोजन को चारों तरफ से घेर लेता है और शरीर के अंदर खींच लेता है। अंदर यह एक ‘खाद्य रिक्तिका’ (Food vacuole) बनाता है, जहाँ भोजन पचता है और बचा हुआ कचरा शरीर से बाहर फेंक दिया जाता है।

मानव पाचन तंत्र: भोजन की लंबी यात्रा

इंसानों में भोजन को पचाने के लिए एक बहुत लंबी नली होती है, जो हमारे मुँह से शुरू होकर गुदा (Anus) तक जाती है। इसे ‘आहार नाल’ (Alimentary Canal) कहते हैं। आइए इस यात्रा के मुख्य पड़ावों को समझते हैं:

1. मुँह और लार

पाचन की शुरुआत हमारे मुँह से ही हो जाती है। हमारे दाँत भोजन को चबाकर छोटा करते हैं और हमारी जीभ उसमें ‘लार’ (Saliva) मिलाती है। लार में लार एमाइलेज नाम का एक एंजाइम होता है, जो रोटी और चावल में मौजूद जटिल मंड (Starch) को तुरंत मीठी शर्करा में बदल देता है। इसीलिए रोटी चबाने पर मीठी लगने लगती है।

2. ग्रसिका और आमाशय

मुँह से भोजन एक पाइप (ग्रसिका) के जरिए हमारे आमाशय (Stomach) यानी पेट में पहुँचता है। आमाशय की दीवारें तीन बहुत जरूरी चीजें निकालती हैं:

  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): यह अम्ल भोजन में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है और भोजन को अम्लीय बनाता है।
  • पेप्सिन एंजाइम: यह अम्ल की मदद से भोजन में मौजूद प्रोटीन को पचाना शुरू करता है।
  • श्लेष्मा (Mucus): यह पेट की अंदरूनी दीवारों को उस खतरनाक अम्ल से जलने से बचाता है।

3. क्षुद्रांत्र: पाचन का मुख्य केंद्र

आमाशय से भोजन ‘क्षुद्रांत्र’ (छोटी आंत) में जाता है। यह हमारे पाचन तंत्र का सबसे लंबा हिस्सा है (लगभग 6.5 मीटर)। यहीं पर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पूर्ण पाचन होता है। यहाँ दो और अंगों से पाचक रस आते हैं:

  • यकृत (Liver): यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो पित्त रस (Bile juice) बनाती है। यह रस भोजन की अम्लीयता को खत्म करता है और वसा (घी/तेल) की बड़ी गोलियों को छोटे टुकड़ों में तोड़ता है।
  • अग्नाशय (Pancreas): यह ट्रिप्सिन (प्रोटीन पचाने के लिए) और लाइपेज (वसा पचाने के लिए) नामक एंजाइम भेजता है।

4. दीर्घरोम और भोजन का अवशोषण

जब भोजन पूरी तरह पचकर तरल बन जाता है, तो क्षुद्रांत्र की अंदरूनी दीवारों पर उंगली जैसी बहुत सी आकृतियाँ होती हैं जिन्हें दीर्घरोम (Villi) कहते हैं। ये पचे हुए भोजन को सोखकर खून में मिला देते हैं, जिससे पूरे शरीर को ऊर्जा मिलती है।

5. बृहदांत्र और निकास

जो भोजन पच नहीं पाता, वह बृहदांत्र (बड़ी आंत) में भेज दिया जाता है। यहाँ कचरे में मौजूद अतिरिक्त पानी को शरीर सोख लेता है और बचे हुए ठोस कचरे (मल) को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

अब खेलें: मानव पाचन तंत्र क्विज़

जंतुओं और मनुष्यों में पोषण की प्रक्रिया पर आधारित इस महत्वपूर्ण विज्ञान क्विज़ को खेलें और अपनी जानकारी परखें!

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महत्वपूर्ण विज्ञान परिभाषाएँ और व्याख्या

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