भाग 4: मानव में वहन (परिवहन तंत्र, हृदय और रुधिर) – UP Board Class 10 Science

पिछले भाग में हमने जाना कि सांस लेने से ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों तक पहुँचती है और खाना पचने के बाद हमारी छोटी आंत में तरल बन जाता है। लेकिन, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फेफड़ों की ऑक्सीजन और आंत का भोजन हमारे सिर से लेकर पैरों तक (हर एक कोशिका तक) कैसे पहुँचता है?

जिस तरह हमारे घरों में पानी पहुँचाने के लिए पाइपलाइन और मोटर पंप होते हैं, बिल्कुल उसी तरह हमारे शरीर में भी एक बहुत ही शानदार ‘परिवहन तंत्र’ (Transportation System) है। इसमें मोटर का काम हमारा ‘हृदय’ (Heart) करता है और पाइप का काम हमारी खून की नलिकाएं करती हैं। आइए शरीर के इस अद्भुत तंत्र को गहराई से समझते हैं।

1. रुधिर: शरीर का ट्रांसपोर्टर

रुधिर या खून एक तरल संयोजी ऊतक (Fluid connective tissue) है। खून के अंदर एक बहने वाला पीला तरल पदार्थ होता है, जिसे प्लाज्मा (Plasma) कहते हैं। इसी प्लाज्मा में खून की सभी कोशिकाएं (जैसे लाल और सफेद रक्त कणिकाएं) तैरती रहती हैं।

प्लाज्मा पचे हुए भोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और शरीर के कचरे को घुली हुई अवस्था में एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है। जबकि फेफड़ों से ऑक्सीजन को ढोने का काम खून में मौजूद लाल रुधिर कणिकाएं (RBCs) करती हैं।

2. हमारा पंप: हृदय

हृदय एक पेशियों से बना अंग है जो लगभग हमारी मुट्ठी के आकार का होता है। इसका काम पूरे शरीर में खून को धकेलना (Pump करना) है। चूँकि हमारे खून को ऑक्सीजन भी ढोनी होती है और कार्बन डाइऑक्साइड भी, इसलिए शुद्ध (ऑक्सीजन वाले) और अशुद्ध (बिना ऑक्सीजन वाले) खून को आपस में मिलने से रोकने के लिए हमारा हृदय चार कोष्ठों (Chambers) में बँटा होता है।

हृदय कैसे काम करता है?

  1. फेफड़ों से ऑक्सीजन भरा साफ खून हृदय के ऊपरी बाएँ कमरे (बायाँ अलिंद) में आता है।
  2. जब बायाँ अलिंद सिकुड़ता है, तो खून नीचे वाले कमरे (बायाँ निलय) में चला जाता है।
  3. बायाँ निलय पूरी ताकत से सिकुड़ता है और साफ खून को पूरे शरीर में पंप कर देता है।
  4. पूरे शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड वाला अशुद्ध खून हृदय के दाएँ हिस्से (दायाँ अलिंद और दायाँ निलय) में आता है, जहाँ से इसे साफ होने के लिए वापस फेफड़ों में भेज दिया जाता है।

3. रुधिर वाहिकाएँ: धमनी और शिरा

हमारे शरीर में खून दो तरह की पाइपों (नलिकाओं) में बहता है:

  • धमनी (Artery): ये नलिकाएं हृदय से साफ खून को पूरे शरीर तक ले जाती हैं। चूँकि हृदय खून को बहुत दबाव (Pressure) से धकेलता है, इसलिए धमनियों की दीवारें मोटी और लचीली होती हैं।
  • शिराएँ (Veins): ये नलिकाएं पूरे शरीर से अशुद्ध खून को वापस हृदय में लाती हैं। इनमें खून का दबाव कम होता है। खून को उल्टा बहने से रोकने के लिए इनमें वाल्व (Valves) लगे होते हैं।

4. प्लेटलैट्स और लसिका

प्लेटलैट्स: जरा सोचिए, अगर हमारी खून की पाइप (नसों) में कोई लीकेज हो जाए (चोट लग जाए) तो क्या होगा? सारा खून बह जाएगा और पंप का प्रेशर गिर जाएगा। इसे रोकने के लिए खून में ‘प्लेटलैट्स’ कोशिकाएं होती हैं। चोट लगने पर ये तुरंत वहाँ पहुँचकर खून का थक्का (Clot) जमा देती हैं और रास्ता बंद कर देती हैं।

लसिका (Lymph): खून के अलावा हमारे शरीर में एक और रंगहीन तरल बहता है जिसे लसिका कहते हैं। यह बिल्कुल प्लाज्मा की तरह होता है, लेकिन इसमें प्रोटीन कम होता है। लसिका का मुख्य काम पचे हुए वसा (फैट) को शरीर में ले जाना और बीमारियों से लड़ना है।

अब खेलें: मानव परिवहन तंत्र क्विज़

नीचे दिए गए क्विज़ में भाग लें और मानव हृदय, खून और धमनियों से जुड़े 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें!

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महत्वपूर्ण विज्ञान परिभाषाएँ और व्याख्या

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