पिछले भाग में हमने इंसानों के अंदर खून और हृदय के जरिए होने वाले परिवहन को समझा था। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक 100 फुट ऊंचे पेड़ की सबसे ऊपरी पत्ती तक जमीन का पानी कैसे पहुँचता है? पेड़-पौधों के पास तो कोई दिल (Heart) या मोटर पंप नहीं होता जो पानी को ऊपर फेंक सके!
पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए मिट्टी से पानी और खनिज लवण लेते हैं और अपनी पत्तियों में भोजन बनाते हैं। इस पानी को ऊपर ले जाने और पत्तियों में बने भोजन को जड़ों तक वापस लाने के लिए पौधों में एक बहुत ही खास ‘संवहन तंत्र’ (Transport System) होता है। आइए जानते हैं कि यह तंत्र बिना किसी मोटर के कैसे काम करता है!
पादपों में परिवहन की आवश्यकता क्यों?
पौधे एक जगह स्थिर रहते हैं, वे हमारी तरह चलते-फिरते नहीं हैं। उनके शरीर का एक बड़ा हिस्सा मृत कोशिकाओं (Dead cells) से बना होता है, इसलिए उन्हें ऊर्जा की बहुत कम आवश्यकता होती है। लेकिन जब पेड़ बहुत ऊंचे हो जाते हैं, तो केवल विसरण (Diffusion) प्रक्रिया से काम नहीं चलता। इसलिए उन्हें एक सुदृढ़ परिवहन प्रणाली की जरूरत होती है।
पौधों में परिवहन के दो मुख्य मार्ग होते हैं:
- जाइलम (Xylem): यह मिट्टी से पानी और खनिज लवणों को ऊपर ले जाता है।
- फ्लोएम (Phloem): यह पत्तियों में बने भोजन को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाता है।
1. जल का परिवहन: जाइलम का कार्य
जाइलम ऊतक जड़ों, तनों और पत्तियों में आपस में जुड़कर पानी ले जाने वाली पाइपों का एक लगातार जाल बनाता है। मिट्टी के अंदर जड़ें सक्रिय रूप से आयन (Ions) खींचती हैं, जिससे मिट्टी और जड़ के बीच एक अंतर पैदा हो जाता है। इस अंतर को मिटाने के लिए पानी खुद-ब-खुद जड़ों के अंदर घुस जाता है। इसे ‘मूल दाब’ (Root pressure) कहते हैं। लेकिन ऊंचे पेड़ों के लिए सिर्फ यह दाब काफी नहीं होता।
वाष्पोत्सर्जन कर्षण (Transpiration Pull)
दिन के समय जब पत्तियों के रंध्र (Stomata) खुले होते हैं, तो पत्तियों से पानी भाप बनकर लगातार उड़ता रहता है। इस प्रक्रिया को वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कहते हैं। पानी के इस तरह उड़ने से जाइलम की नलिकाओं में ऊपर की तरफ एक भयंकर खिंचाव (Suction) पैदा होता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे हम स्ट्रॉ से नारियल पानी खींचते हैं। यही खिंचाव या ‘कर्षण’ पानी को जड़ों से खींचकर पेड़ की सबसे ऊंची फुनगी तक पहुँचा देता है। वाष्पोत्सर्जन पौधे को गर्मी में ठंडा रखने में भी मदद करता है।
2. भोजन का परिवहन: फ्लोएम का कार्य
पत्तियों में तैयार किए गए भोजन (ग्लूकोज़/सुक्रोज़) और अमीनो अम्लों को पौधे के अन्य भागों (जड़ों, फलों, बीजों) तक पहुँचाने की प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। यह काम ‘फ्लोएम’ ऊतक द्वारा किया जाता है। फ्लोएम में भोजन को खिसकाने के लिए चालनी नलिकाओं (Sieve tubes) और साथी कोशिकाओं का उपयोग होता है।
ए.टी.पी. (ATP) का उपयोग
जाइलम में पानी भौतिक बलों (खिंचाव) से ऊपर चढ़ता है, लेकिन फ्लोएम में भोजन को खिसकाने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। फ्लोएम ऊतक भोजन को स्थानांतरित करने के लिए ए.टी.पी. (ATP) से ऊर्जा लेता है। ऊर्जा मिलने से उस हिस्से का परासरण दाब (Osmotic pressure) बढ़ जाता है, पानी अंदर आता है और भोजन वहां से खिसक कर कम दाब वाले हिस्सों (जहां भोजन की जरूरत है) तक पहुँच जाता है। बसंत के मौसम में जड़ों में जमा भोजन इसी तरह नई कलियों तक पहुँचता है।
विशेष नोट: जाइलम में पानी हमेशा नीचे से ऊपर (एक दिशा में) जाता है, जबकि फ्लोएम में भोजन ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में जा सकता है।
अब खेलें: पादपों में परिवहन क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और पादपों में जाइलम, फ्लोएम और वाष्पोत्सर्जन पर आधारित इस ज्ञानवर्धक क्विज़ को खेलें!
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अध्याय 5 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: पोषण के प्रकार और पौधों में स्वपोषी पोषण (प्रकाश संश्लेषण)
- भाग 2: जंतुओं और मनुष्यों में पोषण (मानव पाचन तंत्र)
- भाग 3: श्वसन तंत्र और ग्लूकोज़ का विखंडन
- भाग 4: मानव में वहन (परिवहन तंत्र, हृदय और रुधिर)
- You are Reading Here: पादपों में परिवहन (जाइलम और फ्लोएम के कार्य)
- भाग 6: उत्सर्जन तंत्र, वृक्काणु (नेफ्रॉन) और कृत्रिम वृक्क