हमने अब तक देखा कि शरीर को चलाने के लिए हम भोजन करते हैं, सांस लेते हैं और हमारा हृदय उन सभी चीजों को पूरे शरीर में पहुँचाता है। लेकिन, जब शरीर के अंदर इतनी सारी रासायनिक अभिक्रियाएं होती हैं, तो बहुत सा कचरा (Waste material) भी बनता है।
अगर यह कचरा हमारे शरीर या खून में ही रह जाए, तो यह जहर बन सकता है और हमारी जान भी जा सकती है। इसलिए इस कचरे को शरीर से बाहर निकालना बहुत जरूरी है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘उत्सर्जन’ (Excretion) कहते हैं। आइए जानते हैं कि इंसानों और पौधों में यह सफाई अभियान कैसे काम करता है!
1. मानव उत्सर्जन तंत्र
इंसानों के शरीर में खून को छानने और नाइट्रोजन युक्त जहरीले कचरे (जैसे यूरिया और यूरिक अम्ल) को बाहर निकालने के लिए एक पूरा तंत्र होता है। हमारे उत्सर्जन तंत्र के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- एक जोड़ा वृक्क (Kidneys): ये हमारे पेट में रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ राजमा के बीज के आकार के होते हैं। इनका मुख्य काम खून को छानकर उसमें से कचरा (मूत्र) अलग करना है।
- मूत्रवाहिनी (Ureters): ये दो नलियां होती हैं जो दोनों गुर्दों (वृक्क) से छने हुए मूत्र को नीचे मूत्राशय तक लाती हैं।
- मूत्राशय (Urinary Bladder): यह पेशियों से बनी एक थैली है जिसमें मूत्र इकट्ठा होता है।
- मूत्रमार्ग (Urethra): जब मूत्राशय भर जाता है, तो इसी मार्ग से मूत्र को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
2. वृक्काणु: वृक्क की छननी
गुर्दे (Kidney) के अंदर खून छनता कैसे है? दरअसल, हर एक वृक्क के अंदर लाखों की संख्या में बहुत ही छोटी-छोटी छनन इकाइयां होती हैं, जिन्हें वृक्काणु या नेफ्रॉन (Nephron) कहते हैं। नेफ्रॉन ही गुर्दे की मुख्य काम करने वाली इकाई है।
नेफ्रॉन के शुरुआत में एक कप के आकार की रचना होती है जिसे बोमन संपुट (Bowman’s capsule) कहते हैं। इसके अंदर खून की नलियों का एक गुच्छा होता है (ग्लोमेरुलस), जो खून को छानता है। छनने के बाद जो जरूरी चीजें (जैसे पानी, ग्लूकोज़, लवण) गलती से छन जाती हैं, उन्हें नेफ्रॉन की नली दोबारा सोख (पुनरावशोषण) लेती है। बचा हुआ कचरा मूत्र के रूप में बाहर चला जाता है।
3. कृत्रिम वृक्क
कई बार संक्रमण, चोट या किसी बीमारी के कारण इंसान के दोनों गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं। ऐसी स्थिति में खून में जहर (यूरिया) फैलने लगता है। रोगी की जान बचाने के लिए एक मशीन का उपयोग किया जाता है जो गुर्दे की तरह ही खून को छानने का काम करती है। इस मशीन को ‘कृत्रिम वृक्क’ और खून छानने की इस प्रक्रिया को अपोहन या डायलिसिस (Dialysis) कहते हैं।
4. पादपों में उत्सर्जन
पेड़-पौधों के पास इंसानों की तरह कोई गुर्दा या मूत्राशय नहीं होता। वे अपना कचरा बहुत ही अलग तरीकों से बाहर निकालते हैं:
- ऑक्सीजन: प्रकाश संश्लेषण के दौरान बनने वाली ऑक्सीजन पौधों के लिए एक कचरा ही है, जिसे वे रंध्रों से बाहर निकाल देते हैं।
- वाष्पोत्सर्जन: फालतू पानी को वे भाप बनाकर पत्तियों से उड़ा देते हैं।
- पत्तियां गिराना: बहुत सा कचरा पुरानी पत्तियों में जमा हो जाता है। जब पत्तियां पीली होकर गिरती हैं, तो कचरा भी बाहर निकल जाता है।
- गोंद और रेजिन (Gums and Resins): आपने पेड़ों के तने से चिपचिपा गोंद निकलते देखा होगा। यह पुराने जाइलम में जमा उनका अपशिष्ट पदार्थ ही होता है।
अब खेलें: उत्सर्जन तंत्र क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और नेफ्रॉन, गुर्दे और डायलिसिस पर आधारित इस ज्ञानवर्धक क्विज़ को खेलें!
Total Slides: 7
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अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: पोषण के प्रकार और पौधों में स्वपोषी पोषण (प्रकाश संश्लेषण)
- भाग 2: जंतुओं और मनुष्यों में पोषण (मानव पाचन तंत्र)
- भाग 3: श्वसन तंत्र और ग्लूकोज़ का विखंडन
- भाग 4: मानव में वहन (परिवहन तंत्र, हृदय और रुधिर)
- भाग 5: पादपों में परिवहन (जाइलम और फ्लोएम के कार्य)
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